भाभी की ब्ल्यू पेंटी

भाभी की ब्ल्यू पेंटी

मेरी उम्र 29 साल Antarvasna है और मेरी भाभी 27 हैं. मैं पिछले 3 साल से मेरी भाभी का वफादार सेवक हूँ.जब भाभी 3 साल पहले भैया से शादी कर के पहली बार हमारे घर में आई थी तो हमारे घर के संस्कार देख कर काफी हैरान हुई थी.

शादी की सारी रस्मे पूरी होने के बाद घर के और रिश्तेदारों में से सब बड़े एक एक कर के भाभी के पास गए और उन्हें उपहार दे कर आशीर्वाद लेना था सबसे पहले मेरी बारी थी.

हम सब को बारी बारी जा कर भाभी के पैरों में सर रख कर भाभी से आशीर्वाद लेना था, सबसे पहले मेरी बारी थी.

क्योकि मैं घर का सबसे छोटा सदस्य था. हालाँकि रिश्तेदारों में मुझसे छोटे कई थे लेकिन घर के सदस्यों का फस्ट प्रीफरेंस था.

जैसे ही मैं भाभी के सामने झुककर उनके चरणों में अपना सर रखने लगा, भाभी हैरानी से खड़ी हो गयी.

उन्हें ये बात बड़ी अजीब लग रही थी और ऐसी आदत भी नहीं थी. तब मेरी माँ ने उन्हें समझाया की इस में संकोच की कोई बात नहीं है और यह तो घर का रिवाज हैं.

‘जब तक तुम यहाँ रहोगी यह तुम्हारा देवर हमेशा तुम्हारा इसी तरह सम्मान करेगा और हमेशा तुम्हारी आज्ञा में रहेगा. आज से इस पर हम लोगो से ज्यादा तुम्हारा अधिकार हैं. यही इस घर का रिवाज हैं’ माँ ने कहा था.

लेकिन फिर भी जब भी मैं भाभी के चरण छोटा. जो की मैं रोज सुबह और शाम सोने से पहले करता था, या जब भी वो मुझसे कुछ काम कहने पर मैं हाथ जोड़ कर ‘जो आज्ञा भाभी’ कहते हुए सर झुकाता था, तब तक भाभी असहज दिखती थी.

उन्हें इन बातों की ज़रा सी भी आदत नहीं थी, वो हमेशा मुझसे कहती की मेरी जगह उनके चरणों में नहीं बल्कि दिल में है. फिर धीरे धीरे भाभी को मेरी नम्रता की आदत हो गयी.

मेरे द्वारा उनके चरण छूने से उनका संकोच करना अब बंद हो गया. मुझे कोई काम बताते समय उन्होंने प्लीज कहना बंद कर दिया और उनके टोन में सुपेरिओरिटी झलकने लगी.

अब वो मुझसे अपने पर्सनल काम भी बिना संकोच के करवाने लगी. जैसे उनका बिस्तर लगाना या उनके नहाने के लिए पानी निकालना यहाँ तक की वो मुझसे अपने जूते भी साफ़ करवाने लगी.

फिर भैया ने शहर में फ्लैट ले लिया और वो वहां शिफ्ट हो गयी. मैं भी उनके साथ वहां शिफ्ट हो गया ताकि मैं भैया से बिज़नस की बारीकियां सीख सकूँ, क्योंकि मेरी कॉलेज भी अभी अभी पूरी हो गयी थी.

वहां रहने लगने के बाद भाभी मेरे साथ और भी सहज हो गयी, अब उनका संकोच पूरी तरह निकल गया. भैया ज्यादातर समय काम की वजह से बाहर रहते और मैं ज्यादा समय भाभी की सेवा में बिताने लगा.

माँ और पिताजी गाँव में ही रहते थे. वो गाँव के ज़मींदार जो थे. वहां हमारी काफी बड़ी हवेली और बहुत बड़ी जायदाद थी. मुझे और भैया को काम करने की वैसे तो कोई जरुरत नहीं थी.

लेकिन भैया को काम करना पसंद था. वो अब बहुत बड़े कांट्रेक्टर बन गए थे, मैं भी उनके साथ थोडा थोडा सीख रहा था लेकिन मुझे उस काम में उतनी रूचि नहीं थी. तो ज्यादातर समय मैं उसकी सेवा में ही बिताया करता था.

अब तीन साल बाद मेरी दिनचर्या कुछ इस प्रकार की हैं.

भैया जल्दी उठके काम पर निकल जाते हैं. मैं भी जल्दी उठकर मैड ने बनाया हुआ नाश्ता और चाय चख कर देख लेता हूँ. मुझे अच्छी तरह से पता हैं की उसको कैसी चाय पसंद हैं.

अगर मुझे लगा की मैड ने बनाया हुआ नाश्ता या चाय भाभी को पसंद नहीं आएगा तो मैं खुद ही उसमे सुधार कर लेता हूँ या जरुरत पड़ने पर नया बना देता हूँ.

फिर मैं भाभी के बाथरूम जाकर उनका टॉयलेट चेक करता हूँ और जरुरत पड़ने पर साफ़ कर देता हूँ.

फिर उनके नहाने की तैयारियां जैसे बात टब सही तापमान पर रेडी करना, उनका टॉवल और कपडे बाथरूम में रखना और बाथरूम साफ़ करना जैसे काम करता हूँ.

फिर भाभी के बेडरूम में जाकर उनके बेड के नीचे रखे हुए स्लिपर्स साफ़ करता हूँ. फिर उनके टूथ ब्रश धो देता हूँ. उनके पिने के लिए पानी उनके बेड के साइड के टेबल पर रख देता हूँ.

फिर ज़मीन पर उनके पैरों के पास बैठ कर उनके जागने की प्रतीक्षा करता हूँ.

कभी कभी वो सो जाने से पहले मुझे उन्हें जगाने का आदेश देती हैं तब मैं उनके बताए समय पर उन्हें जगाने के लिए उनके पांव हलके हाथों से दबाने लगता हूँ.

उनके उठते ही मैं उन्हें पिने के लिए पानी दे देता हूँ. फिर उन्हें स्लिपर्स पहना कर उनके पीछे उनका ब्रश ले कर बाथरूम चला जाता हूँ. फिर उनके ब्रश में पेस्ट लगा कर ब्रश उनके हाथ में दे देता हूँ.

फिर उनके बैठने के लिए टॉयलेट सिट का कवर उठा कर बाहर चला जाता हूँ. बाथरूम के दरवाजे के बाहर खड़ा रह कर मैं उनके आदेश की प्रतीक्षा करता हूँ.

टॉयलेट और ब्रश होने के बाद वो मुझे आवाज लगाती हैं तो मैं तुरंत जा कर उनका टॉयलेट फ्लश करता हूँ और उनका ब्रश भी साफ़ कर देता हूँ.

फिर बाथ टब में साबुन मिला कर झाग कर के और बाथ टब ठीक से तैयार करके बाहर जाता हूँ. उनका ब्रश सही जगह पर रख के मैं बाथरूम के दरवाजे के बाहर खड़ा रहता हूँ.

नहा कर मेरे अन्दर रखे हुए ब्रा पेंटी पहन के और टॉवल लपेट कर वो बाहर आती हैं तो मैं उनके पीछे उनके ड्रेसिंग टेबल तक चला जाता हूँ, वो स्टूल पर बैठती हैं तो मैं उनके चरणों के पास बैठ कर उनके पैरों में क्रीम लगा देता हूँ.

फिर खड़ा होकर उनके बाल संवारता हूँ, फिर उनके आदेश के मुताबिक अन्य सेवाएँ, जैसे उनके चरणों की मालिश करना, उनके कंधे दबाना, वगेरह करके उनके आदेश पर उनके बाथरूम जा कर सफाई करता हूँ.

तथा उनके उतारे कपडे धो कर बाहर आ जाता हूँ, तब तक भाभी घर में दिन के वक़्त पहनने वाला गाउन पहन कर बेड पर बैठी होती हैं. मैं उनके चरणों में सर रखके उनका आशीर्वाद ले लेता हूँ.

फिर वो मुझे नाश्ता लाने का हुक्म देती हैं तो मैं नाश्ता और चाय लाकर उनके चरणों में बैठ कर उनके कहने तक उन्हें न्यूज़पेपर पढ़ के सुनाता हूँ. नाश्ते के बाद वो बेड पर लेट जाती है और मुझे टीवी ओन करने की आज्ञा देती हैं.

मैं टीवी ओन करके उनके पसंद का प्रोग्राम लगाने तक चैनल स्क्रॉल करता हूँ. फिर रिमोट उनके हाथ के पास रख कर ज़मीन पर बैठ कर उनके पैर दबाने लगता हूँ.

कुछ देर बाद वो मुझे हाथों के इशारे से (या कभी कभी लात मार कर) जाने की आज्ञा देती हैं तो मैं उनके झूठे बर्तन ले जाकर साफ़ कर देता हूँ.

फिर मैं भी नाश्ता कर लेता हूँ. मुझे उस दिन ज्यादा ख़ुशी मिलती हैं जब भाभी मेरे लिए अपना झूठा खाना प्लेट में छोड़ देती हैं. वो खाना मेरे लिए अमृत से कम नहीं.

खेर, नाश्ते के बाद मैं भी अपने रूम में जा कर नाहा धो कर तैयार होता हूँ और कपडे पहन कर भाभी के रूम में जाकर चरणों में बैठ कर इंतज़ार करता हूँ की वो मुझे नोटिस करे और मैं उनसे काम पर जाने की आज्ञा ले सकूँ.

उनके प्रोग्राम देखते समय बीच में बोलकर मैं उन्हें परेशान नहीं करता. जैसे ही कमर्शिअल आते है या जब उनका मन हो तब वो मेरी तरफ देखती गई.

तो मैं अत्यंत ही धीमी आवाज में और कम से कम शब्दों में उनसे काम पर जाने की आज्ञा मांगता हूँ.

उनकी मर्ज़ी के मुताबिक वो मुझे इज्ज़त देती है या फिर अपने कुछ काम बता कर वहां भेज देती हैं या फिर घर में ही किसी काम में लगा देती हैं. मेरा काम पर जाना केवल उनकी मर्ज़ी पर ही निर्भर हैं.

काम पर भैया का हाथ बटा कर मैं जल्दी हीघर आ जाता हूँ. भैया मुझे ज्यादा काम में नहीं लगाते क्योंकि उन्हें पता होता हैं की घर में भाभी अकेली बोर हो जाएगी.

घर आते ही मैं पहले नहा धोकर साफ़ हो जाता हूँ और घर के कपडे पहन कर भाभी के चरणों में उपस्थित हो जाता हूँ.

फिर भाभी मुझसे अपने पैर दबवाने या नाख़ून कटवाने जैसे छोटे मोटे काम करवा लेती हैं.

भैया के आने के बाद हम सब साथ में खाना खाते हैं और भाभी और भैया थोड़ी देर बैठ कर लिविंग रूम में टीवी देखते हुए बातें करते हैं. तब तक मैं भाभी के और मेरे बर्तन धो देता हूँ.

बाकी सारे बर्तन मैड सुबह आ कर साफ़ करती हैं. फिर मैं भाभी के बाथरूम में जा कर सफाई करता हूँ और भाभी के बेड तैयार करके लिविंग रूम में जा कर भाभी के चरणों के पास बैठ कर टीवी देखता हूँ.

थोड़ी देर बाद भाभी सोने जाती है और भैया लैपटॉप पर बैठ कर अपना काम करते हैं.

मैं भाभी के पीछे उनके बेडरूम जाकर उनके स्लिपर उतारता हूँ और उनका नाईट ड्रेस निकालकर उनके बेड पर रख कर बेड के नीचे सर ज़मीन पर रख कर बैठ जाता हूँ ताकि भाभी बेड पर बैठ कर अपना ड्रेस चेंज कर सके.

फिर उनका उतारा हुआ ड्रेस ले कर बाथरूम जा कर धो लेता हूँ और वापस आकर भैया के सोने के लिए आने तक भाभी के पैर दबाता हूँ.

भैया के आने के बाद मुझसे काम के बारे में दो चार बातें करते है फिर मैं भाभी के चरणों में वंदन करके सोने चला जाता हूँ

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *