रजनी के बड़े बूब्स

रजनी के बड़े बूब्स

रजनी की चूत के अंदर लंड जैसे ही घुसा मुझे अपने लंड की सभी और गर्मी और रोमांच का अनुभव होने लगा. रजनी की चूत के अंदर लंड सही टाईट बैठ चूका था और वो भी मेरे लंड को और जोर से जकड़ के मुझे नया रोमांच देने में मगन थी. मैंने फिर से उसके बड़े बूब्स पकडे और उन्हें दबाते हुए उसकी चूत के अंदर अपने लंड को आगे पीछे करने लगा. रजनी के मुहं से आह आह ओह ओह की आवाजें लगातार आ रही थी और वो मुझे जोर जोर से छोड़ने के लिए आह्वान कर रही थी.
बड़े बूब्स दबा के चूत मारी

रजनी: सर और जोर से चोदो मुझे प्लीज़, आप का लंड बड़ा ही प्यारा हैं. मेरी चूत की गहराई तक लंड डालो और मुझे रंडी की तरह चोद दो. सर आप मस्त चोदते हो.

मैं रजनी के बाल खींचे और उसे ऐसे लंड के झटके दिए जैसे उसकी चूत को लंड से फाड़ डालनी हो.

मैं: ले मेरी रंडी, मादरचोद, बेन्चोद, ले मेरा लंड. ले अपनी दो टके की चूत में मेरा महाराज के जैसा लोड़ा. और जोर से चीख साली रंडी मुझे बहुत मजा आ रहा हैं.

और रंडी बनी रजनी सच में जोर जोर से मेरे लंड के ऊपर झटके मारने लगी. मैं वो बड़े बूब्स और भी जोर जोर से कस के दबा रहा था और उसे और भी जोर से चोदने लगा था. रजनी मेरे लौड़े को अपनी चूत की गहराई तक लेती थी और फिर एक झटके में वो सिर्फ सुपाडे को अंदर रख के बाकी के पुरे लंड को बहार निकाल देती थी. मुझे और रजनी दोनों ही को इस सेक्स आसन से मजा आ रहा था. रजनी जोर जोर से कुल्हें हिला रही थी और मैं उसके बड़े बूब्स को कस के दबा के लंड का सारा प्रेशर उसकी चूत को दे रहा था.

कुछ 5 मिनिट ऐसी हार्ड चुदाई के बाद रजनी थोड़ी थकी सी लगी. उसने अपने कुल्हें हिलाने की गति को काफी कम कर दिया और मैंने भी उसके बड़े बूब्स के ऊपर की अपनी ग्रिप को थोडा लूज़ किया. मैंने उसे पूछा, “क्या हुआ मेरी रंडी इतनी जल्दी थक कैसे गई.?”

रजनी ने कहा, “थका कोई नहीं हैं सर, पोजीशन बदल के करते हैं. मुझे उल्टा कर के चोदिये ना. ऐसा करने से मेरी चूत की गहराई तक लंड जायेंगा.”

रजनी के प्रस्ताव से मैं तुरंत सहमत हुआ और मैंने अपना लंड निकाल लिया. रजनी ने अपने बड़े बूब्स मेरे मुहं में चखने के लिए दिए. और फिर वो तुरंत उलटी हो गई. मैंने उसकी गांड को पकड के फैला दिया और पीछे से उसकी चूत के छेद पे थूंक दिया. रजनी ने पीछे हाथ ले के मेरा लंड पकड़ा और उसे अपनी चूत की और ले गई. मैंने उसकी गांड को अभी भी फैला के रखा हुआ था. रजनी ने लंड को अपनी चूत के होंठो के ऊपर मसला और फिर बोली, “डाल दीजिए सर, मैं और बर्दास्त नहीं कर सकती हूँ.”

रजनी के इतना कहते ही मैंने एक जोर का झटका दे के अपना लंड रजनी की चूत के आरपार कर दिया. रजनी की आह निकल पड़ी और उसने मुझे जांघ के पास से पकड लिया. “सर जरा धीरे से मेरी चूत फाड़ दोगे क्या.?”

“आज तो तेरी चूत और गांड दोनों फाड़ना हैं मुझे. तबादले के बाद तू घंटा अपनी चूत देंगी मुझे.” मैंने एक जोर का झटका चूत में मारते हुए कहा.

रजनी हंस पड़ी और बोली, “सर सेल्स मिट में तो हम मिलेंगे ना. उस वक्त चोद लेना मुझे होटल में.” रजनी अपने कुलहो को उठा के हिलाने लगी और बोली.

मैंने उसकी गांड के ऊपर एक चमाट मारी और हाथ आगे कर के उसके बड़े बूब्स मसल दिए. फिर मैं ऊपर उठ के उसकी चूत को और भी जोर जोर से चोदने लगा. रजनी के मुहं से आह आह का प्रवाह निरंतर निकल रहा था. मैंने तभी रजनी की गांड के छेद को देखा. उसका पिछवाड़े का छेद मस्त ब्राउन और साफ़ था. शायद उसने पिछवाड़े के छेद के पास से बाल निकालें थे. मैंने अपनी बड़ी ऊँगली उसके ऊपर रख दी और हलके से अंदर की. रजनी की ऊऊऊउ निकल पड़ी लेकिन उसने मेरी इस क्रिया का विरोध नहीं किया. मैं समझ गया की यह देसी रंडी को भी गांड में लेने में शायद मजा ही आता हैं. मैंने अपने लंड की शाफ्ट पे ऊँगली घिस के उसकी चूत की चिकनाहट ली. वो चिकनाहट को मैंने उसके गांड के छेद पे घिस दिया. एक दो बार ऐसा करने से उसकी गांड का छेद ढीला और गिला हो गया. मैं अब रजनी की गांड मारने का मन बना चूका था.
चूत के बाद दिया गांड में

रजनी की चूत से अब लंड निकाल के मैंने गांड पे रख दिया. वो कुछ करे उसके पहले मैंने एक ही झटके में उस लंड को अंदर किया. रजनी की चीख मेरे कानो में गूंज पड़ी,

“मादरचोद ने मेरी गांड फाड़ दी, उईईइ माँ मैं मर गई रे….!”

लेकिन मैंने उसकी एक नहीं सुनी. मैंने उसकी गांड पे चमाट मारी और मैं लंड को उसकी गांड के अंदर बहार करने लगा. रजनी के बड़े बूब्स हवा में इधर उधर हो रहे थे और वो मेरे लंड की मार अपनी गांड में ले रही थी. रजनी की साँसे फुल चुकी थी और उस से अब हिला भी नहीं जा रहा था. मैं अपने तगड़े लंड की उसकी गांड की गहराई तक डाल के जब बहार निकालता था तो उसकी आह निकल जाती थी. मुझे चूत से ज्यादा गांड की चुदाई में मजा आ रही थी. रजनी को स्वस्थ होने में काफी समय लगा. और फिर वो भी अपनी गांड और बड़े बूब्स उठा उठा के लंड के ऊपर उछलने लगी. मैंने भी निचे से उसकी गांड को कस कस के मारना चालू कर दिया.

और इस खिंचातानी में मेरा वीर्य निकल के उसकी गांड को भरने लगा. रजनी ने गांड को जोर से दबा के सारे वीर्य को अंदर ही ले लिया और वो वही लेट गई. मैंने लंड निकाल के अपने कपडे पहने और सिगरेट सुलगा के कस लेने लगा. रजनी एक मिनिट के बाद उठी और उसने मेरे मुहं से सिगरेट निकाल के एक कस लिया और बोली, “सर आप तबादले के पेपर पे साइन कब करेंगे?”

मैंने खिन्न स्वर में कहा, “कल सुबह में ही.” मैं नहीं चाहता था ऐसा भारी माल मेरी ब्रांच से कही और जाएँ.

रजनी ने उसके बाद जो कहा वो मेरी समझ में एकदम से नहीं आया. वो बोली, “सर आप ने तो कहा था की आप को अच्छे वर्कर की जरुरत हैं. फिर आप साइन ना करें प्लीज़.”

मैं समझू उसके पहले ही वो बोली, “आज एक अरसे के बाद मैं भी तृप्त हुई हूँ और मैं चाहती हूँ की आप के पास ही रहूँ. मेरा पति सामजिक चीजों में मेरी मदद करेंगा लेकिन शरीर की भूख तो आप के जैसा मर्द ही पूरी कर सकता हैं…!”

रजनी आज भी मेरी ब्रांच में हैं और मुझे अपनी चूत, बड़े बूब्स और गांड का मजा देती हैं. मैं उसे जब चाहें तब छुट्टी सेंक्सन कर देता हूँ ताकि उसके पति को भी हड्डी के बचेकुचे टुकड़े मिलते रहे

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